फंडामेंटल एनालिसिस

IPO क्या होता है

IPO क्या होता है
तो आइये हम जानते हैं कि आईपीओ क्या है और IPO में Invest कैसे किया जाता है? क्या हमें IPO में Invest करना चाहिए या नहीं। अगर आप Share Market पर पल पल की खबर रखते हैं तो आप ज़रूर IPO के बारे में सुनते होंगे।

आईपीओ क्या है, आईपीओ में इन्वेस्ट करने से पहले ध्यान देने वाले बातें

इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग एक प्रक्रिया है जिसमें एक कंपनी पहली बार अपनी शेयर्स स्टॉक मार्केट में जनता को, फंड जुटाने के लिए ऑफर करती है।

एक आईपीओ में, इंस्टीटूशन्स और साथ ही रिटेल इन्वेस्टर्स, IPO क्या होता है दोनों भाग ले सकते हैं और इस कारण से, इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग में इंवेस्टमेंट्स, इन्वेस्टर्स द्वारा काफी उत्साह से देखा जाता है ।

स्टॉक की कीमत आईपीओ के दौरान इश्यू सेल द्वारा निर्धारित की जाती है, जो ऊपर या नीचे जा सकती है और यह कंपनी के स्टॉक में इन्वेस्टर्स की रुचि (इंटरेस्ट) पर निर्भर करती है।

साल 2021 के दौरान, भारत में विभिन कंपनियों ने 1.2 लाख करोड़ रूपए का रिकॉर्ड पैसा आईपीओ के द्वारा स्टॉक मार्केट में इन्वेस्टर्स से उठाएं थें। जो की भारत में किसी एक कैलेंडर साल में अब तक का, आईपीओ से उठाये गए सबसे बड़ा अमाउंट है। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) के डेटा के अनुसार, साल 2021 में कुल मिला कर 115 कंपनियों ने SEBI के पास अप्रूवल के लिए अपने डाक्यूमेंट्स जमा दिए थें। इनमे से 63 इंडियन कंपनियों ने साल 2021 में आईपीओ स्टॉक मार्केट में लॉन्च किये थें।

IPO में IPO क्या होता है उपयोग की जाने वाली प्रमुख टर्म्स।

नीचे इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग में इस्तेमाल किये जाने बाले टर्म्स दिए गएँ हैं जिनका उपयोग अक्सर तब किया जाता है जब हम आईपीओ पर चर्चा या उसकी एनालिसिस करते हैं:

  • Abridgedप्रॉस्पेक्टस – यह आईपीओ प्रॉस्पेक्टस का समरी है जिसमें प्राइमरी प्रॉस्पेक्टस की सभी मुख्य विशेषताएं शामिल हैं।
  • Draft Red Herring Prospectus,ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (DRHP) – यह डॉक्यूमेंट सिक्योरिटीज & एक्सचेंज बोर्ड ऑफ़ इंडिया (SEBI) को, कंपनी द्वारा आईपीओ के 21 दिन पहले जमा किया जाना चाहिए।
  • एप्लीकेशन सपोर्टेड बाई ब्लॉक्ड अमाउंट (ASBA)IPO क्या होता है – इसमें इन्वेस्टर्स द्वारा शेयरों के लिए पेमेंट किया गया पैसा इन्वेस्टर्स के खाते में रहता है। IPO क्या होता है जब तक इन्वेस्टर्स को कंपनी द्वारा शेयर अल्लोट नहीं किए जाते तब तक अमाउंट ब्लॉक्ड रहता है।
  • रेड हेरिंग IPO क्या होता है प्रॉस्पेक्टस -इस डॉक्यूमेंट में वे सभी इनफार्मेशन शामिल हैं जो इन्वेस्टर्स को कंपनी के बारे में जानना चाहिए, जैसे कि कंपनी का बिज़नेस अकाउंट, मैनेजमेंट क्वॉलिफिकेशन्स (Management Qualifications ), बिज़नेस का फ्यूचर एप्रोच, आईपीओ प्राइस बैंड, आदि।
  • लिस्टिंग डेट, लिस्टिंग की तारीख – यह वह दिन है जिस दिन स्टॉक एक्सचेंज में आईपीओ शेयरों का कारोबार शुरू होता है।
  • लॉट साइज – शेयरों की मिनिमम संख्या जिसके लिए आईपीओ में बोली लगाई जा सकती है। यदि आप अधिक शेयरों के लिए बोली लगाना चाहते हैं, तो आप मल्टीप्लेस में बोली लगा सकते हैं।
  • ऑफर डेट,ऑफर की तारीख – यह वह शुरुआती तारीख होती है जिस दिन से इन्वेस्टर्स आईपीओ में IPO क्या होता है शेयरों के लिए बोली लगाना शुरू कर सकते हैं।
  • मिनमम सब्सक्रिप्शन (Minimum Subscription) – यह आईपीओ शेयरों का मिनिमम प्रोपोरशन है जिसे रिटेल इन्वेस्टर्स को आईपीओ के लिए सब्सक्राइब करना चाहिए, जो कि कर्रेंटली 90% है।
  • ओवर सब्सक्राइब – यह तब होता है जब इन्वेस्टर्स, कंपनी द्वारा प्रोपोसड शेयरों की संख्या से अधिक बोली लगाते हैं।
  • प्राइस बैंड – यह वह मूल्य लिमिट है जिसके अंदर इन्वेस्टर आईपीओ शेयरों के लिए बोली लगा सकते हैं।
  • बुक बिल्डिंग प्रोसेस – यह आईपीओ के लिए इश्यू प्राइस तय करने की प्रोसेस है जो इन्वेस्टर्स द्वारा बोली लगाने वाली कीमतों पर निर्भर करती है।
  • फ्लोर प्राइस – यह आईपीओ के लिए आवेदन करते समय प्रति शेयर का सबसे कम कीमत है। इश्यू प्राइस- यह वह कीमत है जिस पर शेयर, एक्सचेंज में लिस्टेड होने पर इन्वेस्टर्स को अलॉट किया जाता है।
  • कट-ऑफ प्राइस – यह सबसे कम इशू प्राइस है, जिस पर शेयर्स आल्लोट किए जाते हैं।
  • अंडरराइटर (underwriter) – वे इन्वेस्टमेंट बैंकर्स हैं जो कंपनी की इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग और बुक बिल्डिंग प्रोसेस मैनेज करते है।

आईपीओ में इन्वेस्ट करने से पहले, नीचे दिए गए कुछ विशेष बातों को चेक करें।

रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस पढ़ें:

ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस एक कंपनी द्वारा सेबी (SEBI) के पास जमा किया जाता है जब वह जनता को अपने शेयर बेचकर धन जुटाना चाहती है।

यह डॉक्यूमेंट बताता है कि कंपनी कैसे, जुटाई जाने वाली जनता के पैसे का उपयोग करना चाहती है, और इन्वेस्टर्स के लिए पॉसिबल रिस्क्स क्या हैं। DRHP में कंपनी के बारे में वह सब कुछ लिखा होता है जो एक इन्वेस्टर को कंपनी के बारे में पता होना चाहिए। जैसे फाइनेंसियल हिस्ट्री, कंपनी का स्ट्रेंथ, रिस्क, कंपनी के विरुद्ध कोई कानूनी प्रक्रिया चल रही है या नहीं, आदि। इस लिए, इन्वेस्टर्स को किसी भी आईपीओ में इन्वेस्ट करने से पहले इस डॉक्यूमेंट को पढ़ना चाहिए ।

फण्ड जुटाने के पीछे कारण:

ध्यान दें कि यह जांचना आवश्यक है कि कंपनी द्वारा IPO से जुटाई गई फंड्स का उपयोग कैसे किया जाएगा।

आईपीओ का क्या मतलब है

आईपीओ (IPO), वह प्रक्रिया है, जब कोई कंपनी, फर्स्ट टाइम अपने शेयरों को पब्लिक या सामान्य जनता के समक्ष खरीदने की पेशकश रखता है। इसी वजह से इसे प्रारंभिक सार्वजनिक प्रस्ताव (Initial Public Offering) कहते है। यही प्रक्रिया IPO होती हैं।

साधारणत: प्राइवेट कंपनियां या कॉर्पोरेशन कंपनियां, कम्पनी के लिए बडी मात्रा में पूंजी एकत्र करने के लिए आईपीओ की सुविधा पेश की जाती हैं। कई क्षेत्रों में सरकारी कंपनियां भी विनिवेश (disinvestment) के द्वारा पूंजी एकत्रित करने के लिए आईपीओ (IPO) लाती हैं। विनिवेश के प्रोसेस में, शेयर मार्केट के द्वारा, कोई – कोई सरकारी कम्पनिया अपनी कुछ हिस्सेदारी, लोगों को भी बेचती है | कंपनी बाज़ार से पूँजी इक्कठा कर अपने बिज़नेस में एक्सपेंशन करती है और ज्यादा मुनाफा कमाकर अपने शेयर धारको के बीच बाटती है | इससे कंपनी और कंपनी में निवेश करने वाले निवेशक को भी लाभ मिलता है |

आईपीओ (IPO) की कीमत तय की प्रक्रिया

  • प्राइस बैंड (Price Band) |
  • दूसरा फिक्स्ड प्राइस इश्यू (Fixed price Issue)।

जिन कंपनियों को आईपीओ (IPO) लाने की अनुमति प्राप्त हो जाती है तो उसे अपने सभी शेयरों की कीमत तय करने का अधिकार होता हैं | इसके अलावा इन्फ्रास्ट्रक्चर और कुछ अन्य क्षेत्रों की कंपनियों को सेबी (SEBI) और बैंकों को रिजर्व बैंक (RBI) से अनुमति लेना जरूरी होता है | भारत में 20 फीसदी प्राइस बैंड की ही अनुमति प्रदान की गई है |

LIC IPO ने कराया नुकसान, अब निवेशकों को बेहतर रिटर्न के लिए सरकार ने बनाया प्लान

LIC IPO ने कराया नुकसान, अब निवेशकों को बेहतर रिटर्न के लिए सरकार ने बनाया प्लान

देश की सबसे बड़ी बीमा कंपनी भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) का आईपीओ जिन निवेशकों को अलॉट हुआ है, वो अब तक नुकसान में हैं। अब सरकार ने निवेशकों को बेहतर रिटर्न के लिए एक नया प्लान बनाया है। बता दें कि एलआईसी के आईपीओ से सरकार को 21,000 करोड़ रुपये प्राप्त हुए थे।

क्या है प्लान: एक अधिकारी के मुताबिक वित्त मंत्रालय कंपनी के प्रदर्शन की समीक्षा के दौरान एलआईसी प्रबंधन को उन कदमों के बारे में जागरूक कर रहा है, जो निवेशकों की पूंजी IPO क्या होता है बढ़ाने में सहायक हो सकते हैं। अधिकारी के मुताबिक आधुनिकीकरण की प्रक्रिया शुरू हो गई है। हम प्रबंधन के साथ काम कर रहे हैं ताकि वे अपने उत्पादों की पेशकश का आधुनिकीकरण करें और पॉलिसीधारकों को IPO क्या होता है कम लाभांश का भुगतान करें।

कोई Company IPO क्यों लाती हैं।

Company का कर्ज कम करने लिए: जब किसी कंपनी का कर्ज ज्यादा होता है तो इस स्थिति में कंपनी आईपीओ जारी करती है। कंपनियाँ किसी Bank से Loan लेकर कर्ज की भरपाई करने से बेहतर यह अपने कंपनी के कुछ शेयर बेच कर कर्ज का भुगतान करना आसन समझती हैं। इस तरह से कंपनी कर्ज का भी भुगतान करती है और कंपनी को नए Investor भी मिल जाते हैं।

Company विस्तार के लिए: अगर किसी कंपनी को लगता है कि वह लगातार Develop और बाज़ार में अच्छा Perform कर रही है और विस्तार की जरूरत है यानि अब कंपनी को दूसरे IPO क्या होता है शहरों में भी अपना Business बढ़ाना है और इसके लिए Extra Resources की जरूरत है तो इस स्थिति में कंपनी IPO जारी करती है।

वैसे कंपनी किसी Bank से Loan भी ले सकती है, लेकिन बैंक को Loan Amount के साथ Interest भी लौटाना होता है। लेकिन अगर Company IPO के जरिए Fund इकट्ठा करती है तो उसे किसी तरह का Bank Loan लौटाना नहीं पड़ता और नहीं किसी भी प्रकार का Interest देना पड़ता है।

Types of IPO – आईपीओ के प्रकार:

यदि आप IPO में निवेश करना चाहते हैं, तो आपको IPO IPO क्या होता है के अलग अलग Types के बारे में जानकारी होना चाहिए।

Initial Public Offering (IPO) मुख्य रूप से दो प्रकार के होते हैं:-

Fix Price IPO

कोई भी Company जो आईपीओ जारी करने वाली होती हैं वह आईपीओ जारी करने से पहले Investment Bank के साथ मिलकर IPO के Price के बारे में चर्चा करती है और जारी होने वाले आईपीओ का Price Decide करती है। Investor उस Fixed Price पर ही IPO Subscribe कर सकते हैं।

Book Building IPO

इस तरह के IPO में Company, Investment Bank के साथ मिलकर IPO का एक Price Band Decide करती है। जब आईपीओ की Price Band Decide हो जाती है उसके बाद इसे जारी किया जाता है। इसके बाद Investor उस Decide किए गए Price Band में से अपनी Bid Subscribe करते हैं।

How to Invest in IPO – आईपीओ में इनवेस्ट कैसे किया जाता है?

तो दोस्तों अब तक हमने जाना कि IPO क्या है और आईपीओ क्यो जारी किया जाता है। अब हम जानेगें कि IPO में Investment कैसे कर सकते हैं?

आईपीओ जारी करने वाली कंपनी अपने आईपीओ को इनवेस्टर्स के लिए 3-10 दिनों के लिए ओपन करती है। मतलब कोई भी आईपीओ जब आता है तो उसे कोई भी इनवेस्टर 3 से 10 दिनों के भीतर ही खरीद सकता है। कोई कंपनी अपने आईपीओ जारी करने की अवधि सिर्फ 3 दिन भी रखती है तो कोई तीन दिन से ज्यादा रखती है।

आप इन निश्चित दिनों के भीतर की कंपनी की Official Website पर जाकर या Registered Brokerage के जरिए IPO में Invest कर सकते हैं। अगर Fix Price IPO है तो आपको उसी Fix Price पर IPO के लिए Apply करना होगा और IPO अगर Book Building है तो आपको उस Book Building Issue पर ही Bid लगानी होगी।

What is the IPO Allotment Process – आईपीओ अलॉटमेंट

जब आईपीओ ओपनिंग क्लोज हो जाती है तो कंपनी आईपीओ का अलॉटमेंट करती है। इस प्रोसेस में कंपनी सभी इनवेस्टर्स को आईपीओ अलॉट करती है और इनवेस्टर्स को आईपीओ अलॉट होने के बाद शेयर Stock Market में लिस्ट हो जाते हैं।

स्टॉक मार्केट में लिस्ट होने के बाद शेयर सेकेंड्री मार्केट में खरीदे और बेचे जाते हैं। जब तक शेयर, स्टॉक मार्केट में लिस्ट नहीं होते हैं आप उन्हें नहीं बेच सकते हैं। एक बार जब स्टॉक मार्केट में शेयर लिस्ट हो जाते हैं तो पैसा और शेयर ये दोनों इनवेस्टर के बीच एक्सचेंज होते रहते हैं।

एक बार लिस्ट होने के बाद Stock Market के Timing के अनुसार आप Share को Buy या Sell कर सकते हैं।

आज हमने “IPO kya hai” के बारे में जाना। दोस्तों, अगर आप Share Market में Invest करना चाहते हैं या फ़िर सोच रहें हैं तो आप Personally किसी Financial adviser से जरुर मिले और बिना पूरी जानकरी के Market में Invest ना करे क्यूंकि इससे आपके निवेश के डूबने का डर बना रहता हैं।

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