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चलती औसत का आवेदन

चलती औसत का आवेदन
(स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस)

बीते 8 वर्षों में केन्द्र सरकार को मिले 22.05 करोड़ आवेदन, मात्र 7.22 लाख को मिली नौकरी

सेंट्रल डेस्क । लोकसभा में केंद्र सरकार ने एक लिखित जवाब में बताया है कि बीते आठ सालों में उसके विभिन्न विभागों में नौकरी के 22.05 करोड़ आवेदन आए, जिनमें से केवल 7.22 लाख आवेदकों को ही नौकरी मिल सकी, जो कुल आवेदनों का एक फीसदी से भी कम है. इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक, संसद में प्रस्तुत सरकारी आंकड़ों से यह भी खुलासा हुआ है कि बीते आठ सालों में केंद्र सरकार के विभागों में दी जाने वाली सरकारी नौकरियों की संख्या में साल दर साल गिरावट आई है.

केंद्र सरकार ने बुधवार, 27 जुलाई को लोकसभा में बताया कि 2014-15 से 2021-22 के बीच प्राप्त हुए 22.05 करोड़ आवेदनों में से केवल 7.22 लाख (0.33 फीसदी) आवेदकों को ही विभिन्न केंद्रीय सरकारी विभागों में नियुक्ति मिली.एक लिखित जवाब में कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन मंत्रालय के राज्यमंत्री और प्रधानमंत्री कार्यालय के राज्यमंत्री जितेंद्र सिंह ने लोकसभा को सूचित किया कि वर्ष 2019-2020 में सर्वाधिक उम्मीदवारों (1.47 लाख) की नियुक्तियां हुईं.

(स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस)

व्यापक तौर पर देखने पर सामने आता है कि केंद्र सरकार की नौकरियों में चयनित उम्मीदवारों की संख्या वर्ष 2014-15 से लगातार गिर रही है, केवल वर्ष 2019-20 ही इस बीच अपवाद रहा है.वर्ष 2014-15 में कुल 1.30 लाख उम्मीदवारों की नियुक्ति की सिफारिश की गई थी, लेकिन बाद के सालों में यह संख्या लगातार गिरती गई. 2015-16 में 1.11 लाख, 2016-17 में 1.01 लाख, 2017-18 में 76147, 2018-19 में 38100, 2020-21 में 78555 और 2021-22 में 38850 उम्मीदवारों को नौकरी मिली.

एक तरफ जहां पिछले आठ सालों में केवल 7.22 लाख उम्मीदवारों की नियुक्ति हुई है, तो दूसरी तरफ इसी साल 14 जून को केंद्र सरकार घोषणा करते देखी गई थी कि वह अगले 18 महीनों में 10 लाख लोगों की ‘मिशन मोड’ पर नियुक्ति करेगी.यह घोषणा प्रधानमंत्री कार्यालय ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा सभी विभागों और मंत्रालयों में मानव संसाधनों की स्थिति की समीक्षा करने के बाद की थी.सिंह द्वारा प्रदान सूचना यह भी दिखाती है कि 2014 से प्राप्त हुए कुल 22.05 करोड़ आवदेनों में से 2018-19 में सबसे ज्यादा (5.09 करोड़) आवेदन प्राप्त हुए और सबसे कम वर्ष 2020-21 में (1.80 करोड़) प्राप्त हुए.आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि आठ सालों में प्राप्त कुल आवेदनों का वार्षिक औसत 2.75 करोड़ आवेदन प्रतिवर्ष निकलता है,

वहीं इस दौरान चयनित हुए कुल उम्मीदवारों का वार्षिक औसत 90,288 उम्मीदवार प्रतिवर्ष है.इन आठ सालों के दौरान प्राप्त हुए आवेदनों में हर साल प्राप्त हुए कुल आवेदनों पर मिलने वाली कुल नौकरियों का अनुपात निकालें तो वह 0.7 फीसदी से 0.82 फीसदी के बीच रहा.वर्ष 2018-19 में कुल आवदेन 5,09,36,479 प्राप्त हुए लेकिन नौकरी केवल 0.07 फीसदी (38,100) उम्मीदवारों को ही मिली. वहीं, 2019-20 में सबसे कम 1,78,39,752 आवेदन प्राप्त हुए थे और नौकरी सबसे अधिक (1,47,096) उम्मीदवारों को मिली, जिसका अनुपात 0.82 फीसदी बैठता है. तेलंगाना के कांग्रेस सांसद अनुमुला रेवंत रेड्डी के सवाल के जवाब में नौकरी सृजन संबंधी केंद्र सरकार की विभिन्न योजनाएं गिनाते हुए जितेंद्र सिंह ने कहा, ‘रोजगार सृजन के साथ रोजगार क्षमता बढ़ाना सरकार की प्राथमिकता है. उसी के मुताबिक भारत सरकार ने देश में रोजगार पैदा करने के लिए विभिन्न कदम उठाए हैं.’

अमेरिका में बेरोजगारी लाभ का दावा करने वालों की संख्या घटी

वाशिंगटन, 30 दिसंबर (एपी) अमेरिका में रोजगार की स्थिति सुधर रही है। बेरोजगारी भत्ते के लिए आवेदन करने वालों की संख्या घटकर 200,000 के नीचे आ गयी है। अमेरिकी श्रम विभाग ने बृहस्पतिवार को कहा कि बेरोजगारी लाभ का दावा करने वालों की संख्या 8,000 कम होकर 198,000 पर आ गई। दिसंबर चलती औसत का आवेदन में बेरोजगारी भत्ते के लिए आवेदन करने वालों का चार सप्ताह का औसत 199,000 से थोड़ा अधिक रहा। यह अक्टूबर 1969 के बाद सबसे कम संख्या है। इससे पता चलता है कि कोरोना चलती औसत का आवेदन वायरस के नये स्वरूप ओमीक्रोन के तेजी से फैलने का भी रोजगार पर कोई प्रतिकूल

अमेरिकी श्रम विभाग ने बृहस्पतिवार को कहा कि बेरोजगारी लाभ का दावा करने वालों की संख्या 8,000 कम होकर 198,000 पर आ गई।

दिसंबर में बेरोजगारी भत्ते के लिए आवेदन करने वालों का चार सप्ताह का औसत 199,000 से थोड़ा अधिक रहा। यह अक्टूबर 1969 के बाद सबसे कम संख्या है।

इससे पता चलता है कि कोरोना वायरस के नये स्वरूप ओमीक्रोन के तेजी से फैलने का भी रोजगार पर कोई प्रतिकूल असर नहीं पड़ा है।

श्रम विभाग के अनुसार 18 दिसंबर को समाप्त सप्ताह में 17 लाख अमेरिकी नागरिक बेरोजगारी लाभ ले रहे थे। यह मार्च 2020 के बाद सबसे कम है।

प्रदेश का औसत अनुपात 61 फीसदी, इंदौर का अनुपात 58 फीसदी

इंदौर. नवागत कलेक्टर डॉ. इलैया राजा टी ने कार्यभार ग्रहण करने के तत्काल बाद मतदाता पुनरीक्षण कार्य के लिए आयोजित स्थाई कमेटी की पहली बैठक ली। जनसंख्या के अनुपात में कम वोटर देखकर अधिकारियों और राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों से बोले- इसे औसत 61 फीसदी से ज्यादा करना है। इसके लिए 18 वर्ष या इससे ज्यादा के युवाओं को जोड़ने के लिए अभियान चलाएं। स्कूल में भी हायर सेकेंडरी स्तर के बच्चों के फाॅर्म लें, जिससे उनके नाम भी आयु सीमा पूरी होते ही जुड़ जाएं। उन्होंने राजनीतिक दलों को स्पष्ट कहा, सूची चलती औसत का आवेदन का अच्छे से अध्ययन करके दावे-आपत्ति करें। अभी शिकायत कर लेना, बाद में नहीं। कलेक्टर ने कचरा वाहनों के साथ प्रचार करने के लिए भी कहा, जिससे लोगों में जागरुकता आए। बैठक में अपर कलेक्टर अजय देव शर्मा, अभय बेडेकर, राजेश राठौर, आरएस मंडलोई सहित सभी सदस्य मौजूद थे। जानकारी निर्वाचन प्रभारी प्रतुल सिन्हा ने दी। उन्होंने बताया, आवेदन ऑनलाइन करने की भी व्यवस्था है। बीएलओ ने बैठना शुरू कर दिया है।

प्रदेश का औसत अनुपात 61 फीसदी, इंदौर का अनुपात 58 फीसदी

बूथ कार्यकर्ता, वार्ड पार्षद की भूमिका महत्वपूर्ण
निर्वाचन आयोग के निर्देश पर आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों को देखते हुए बुधवार को मतदाता सूची के प्रारूप का प्रकाशन किया गया। सभी राजनीति दलों को इसकी प्रति दी जाएगी। इसका अंतिम प्रकाशन 5 जनवरी 2023 को होगा। इस बीच इसमें नए नाम जोड़ने, हटाने व संशोधित करने की प्रक्रिया होगी। भाजपा, कांग्रेस सहित अन्य मान्यता प्राप्त दल के प्रतिनिधियों के समक्ष बुधवार को विस्तार से चर्चा की गई। कलेक्टर ने कहा, यह स्थिति ठीक नहीं है। मतदाता की संख्या बढ़ना चाहिए। अभी आधार से लिंक नहीं कर रहे हैं। आधार नंबर की इंट्री कर रहे हैं। विशेष अभियान में भी मात्र 1053 नाम जुड़ने पर उन्होंने अधिकारियों से कारण पूछा। कलेक्टर ने बताया, हमारा पूरा जोर सही मतदाता सूची पर रहेगा। यह कार्य राजनीतिक दलों के सहयोग से ही हो सकता है। बूथ कार्यकर्ता, वार्ड पार्षद व स्थानीय ओपिनियन लीडर इसमें सहयोग करें।

राजनीतिक दलों ने ये दिए सुझाव
- कांग्रेस की ओर से सुझाव दिया गया कि आधार लिंक के लिए नगर निगम जोन पर विशेष डेस्क बनाई जाए।

- भाजपा ने कहा कि मतदाता सूची के लिए अनाउंसमेंट करवाएं, जिससे लोगों को जानकारी मिल सके।
- अन्य दलों ने सुझाव दिया कि ग्रामीण क्षेत्रों में भी अभियान चलाकर मतदाताओं को जोड़ा जाए।

अमेरिका में बेरोजगारी लाभ का दावा करने वालों की संख्या घटी

वाशिंगटन, 30 दिसंबर (एपी) अमेरिका में रोजगार की स्थिति सुधर रही है। बेरोजगारी भत्ते के लिए आवेदन करने वालों की संख्या घटकर 200,000 के नीचे आ गयी है। अमेरिकी श्रम विभाग ने बृहस्पतिवार को कहा कि बेरोजगारी लाभ का दावा करने वालों की संख्या 8,000 कम होकर 198,000 पर आ गई। दिसंबर में बेरोजगारी भत्ते के लिए आवेदन करने वालों का चार सप्ताह का औसत 199,000 से थोड़ा अधिक रहा। यह अक्टूबर 1969 के बाद सबसे कम संख्या है। इससे पता चलता है कि कोरोना वायरस के नये स्वरूप ओमीक्रोन के तेजी से फैलने का भी रोजगार पर कोई प्रतिकूल

अमेरिकी श्रम विभाग ने बृहस्पतिवार को कहा कि बेरोजगारी लाभ का दावा करने वालों की संख्या 8,000 कम होकर 198,000 पर आ गई।

दिसंबर में बेरोजगारी भत्ते के लिए आवेदन करने वालों का चार सप्ताह का औसत 199,000 से थोड़ा अधिक रहा। यह अक्टूबर 1969 के बाद सबसे कम संख्या है।

इससे पता चलता है कि कोरोना वायरस के नये स्वरूप ओमीक्रोन के तेजी से फैलने का भी रोजगार पर कोई प्रतिकूल असर नहीं पड़ा है।

श्रम विभाग के अनुसार 18 दिसंबर को समाप्त सप्ताह में 17 लाख अमेरिकी नागरिक बेरोजगारी लाभ ले रहे थे। यह मार्च 2020 के बाद सबसे कम है।

चलती औसत का आवेदन

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भारत में पेटेंट से संबंधित कुछ तथ्य

  • प्रधानमंत्री आर्थिक सलाहकार परिषद् ने अपने एक पत्र में केंद्र सरकार का ध्यान आकर्षित करने की कोशिश की है। इस पत्र के माध्यम से बताया गया है कि पेटेंट कार्यालय में कर्मचारियों की बहुत कमी है। इसके चलते आवेदनों को आगे बढ़ाने में देर होती है, और अन्य देश इसका लाभ ले जाते हैं।
  • भारत के पेटेंट कार्यालय में 2020 के चीन के 13000 से अधिक और अमेरिका के 8000 के मुकाबले सिर्फ 858 परीक्षक और नियंत्रक थे। जबकि पेटेंट आवेदन 2016-17 में 45,444 से बढ़कर 2021-22 में 66,000 से अधिक हो गए हैं। 2020 में चीन में इन आवेदनों की संख्या 15 लाख और अमेरिका में 6 लाख थी।
  • भारत में जहाँ आवेदनों के निपटान के लिए औसत समय 58 महीने लगते हैंए वहीं जापान में 15, चीन में 20, अमेरिका में 21 माह है।
  • पत्र का तर्क है कि पेटेंट कार्यालय के लिए 2,000 लोगों को काम पर रखने से मदद मिलेगी।
  • विश्व बौद्धिक संपदा संगठन के 2010-19 के आंकड़ों से पता चलता है कि भारतीयों ने देश में (1.2 लाख) और विदेश में (1.07 लाख) आवेदन दिए थे। विदेशों के 44,000 के मुकाबले भारत में केवल 13,670 पेटेंट दिए गए।
  • स्टार्टअप्स के पेटेंट आवेदनों में 2016 के बाद से पांच गुना वृद्धि देखी गई थी, जो 2021-22 में 6000 को छू गई। पेटेंट, स्टार्टअप्स को फंडिंग मुहैया कराने में मदद करते हैं, जो बदले में रोजगार पैदा करते हैं।

भारत में रोजगार के संकट से निपटने के लिए केंद्र सरकार 2024 तक 10 लाख रिक्त पदों को भरना चाहती है। पेटेंट जैसे महत्वपूर्ण विभाग में रिक्तियों को पूरा करने का यह सही समय है।

‘द टाइम्स ऑफ इंडिया’ में प्रकाशित संपादकीय पर आधारित। 22 अगस्त, 2022

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