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पैसा में खाता प्रकार

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savings account kya hai

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बचत खाता क्या पैसा में खाता प्रकार है

बचत खाता या Savings Account किसी बैंक या डाकघर शाखाओं में खुलने वाला एक सामान्य बचत खाता होता है जिसमें खाताधारक की सुविधानुसार और नियमानुसार किसी भी समय धनराशि की लेन-देन या जमा-निकासी की जा सकती है।

किसी भी बैंक या डाकघर बचत खाते में जमा धनराशि पर खाताधारक को नियमानुसार ब्याज भी देय होता है परन्तु भारत में मौजूद सभी सरकार समर्थित निवेश योजनाओं में से बचत खाते पर ब्याज दर न्यूनतम होती है। न्यूनतम ब्याज दर होने के बावजूद बैंक या डाकघर बचत खाते में धनराशि की सुरक्षा और विश्वसनीयता एवं लेन-देन या जमा-निकासी की आसानी व्यक्तियों को बचत खाता खोलने के लिए प्रेरित करती है।

बचत खाता कौन खुलवा सकता है

भारत में 18 वर्ष की आयु प्राप्त कोई भी भारतीय नागरिक सम्बंधित बैंक/ डाकघर शाखा में KYC दस्तावेज़ दिखा कर अपने नाम से बचत खाता (Savings Account) खुलवा सकता है। भारत में बचत खाता पैसा में खाता प्रकार किसी एक व्यस्क व्यक्ति के नाम से एकल रूप से या दो व्यस्क व्यक्तियों के नाम से संयुक्त रूप से खुलवाया जा सकता है। यदि 18 वर्ष से कम आयु के अवयस्क बालक के लिए बचत खाता खुलवाना है तो वह उसके माता-पिता या कानूनी अभिभावक द्वारा खुलवाया जा सकता है।

भारत में पैसा में खाता प्रकार बचत खाता किसी भी नामित बैंक या डाकघर शाखा में खुलवाया जा सकता है।

भारत में बचत खाते कितने प्रकार के होते हैं

भारत में निम्नलिखित प्रकार के बचत खाते (Savings Account) खोले जाने का विकल्प उपलब्ध है:-

  • नियमित बचत खाता
  • वेतन आधारित बचत खाता
  • वरिष्ठ नागरिक बचत खाता
  • नाबालिगों के लिए बचत खाते
  • जीरो बैलेंस सेविंग अकाउंट; आदि

आप उपरोक्त लिखित बचत खातों में से अपनी इच्छा पैसा में खाता प्रकार और योग्यता के अनुसार कोई भी बचत खाता खुलवा सकते हैं।

बचत खाते पर ब्याज दर

भारत में बचत खातों पर ब्याज दर समय-समय पर बदलती रहती है और यह विभिन्न बैंकों के लिए और खाते में जमा कुल धनराशि के अनुसार भी भिन्न-भिन्न हो सकती है। अतः किसी भी बैंक या डाकघर में बचत खाता (Savings Account) खुलवाने से पहले सम्बंधित ब्याज दर अवश्य जाँच लें।

भारत में बचत खातों पर मिलने वाली ब्याज राशि आयकर (इनकम टैक्स) के अधीन आती है और इस पर खाताधारक को नियमानुसार इनकम टैक्स जमा कराना होता पैसा में खाता प्रकार है।

डेब्ट फंड कितने प्रकार के होते हैं?

डेब्ट फंड कितने प्रकार के होते हैं?

जैसे बैंक में आप एक बचत खाता खोल सकते हैं, जहां आप अपनी जरूरत के अनुसार पैसे रख सकते हैं या निकाल सकते हैं।हालांकि यदि आप पैसों को कुछ समय के लिए उपयोग नहीं करने वाले हैं तो उनको यूं ही रखा रहने देने का कोई मतलब नहीं बनता है। ऐसी स्थिति में आप एक फिक्स्ड डिपॉजिट खोल सकते हैं - जहां पर पैसा किसी निश्चित अवधि के लिए बंद रहता है जिससे कि आपको ब्याज की अधिक दर कमाने का अवसर मिलता है। आप आवर्ती जमा को भी चुन सकते हैं, जिसमें आप नियत राशि को निर्धारित अवधि के लिए हर माह जमा करते रहते हैं। ये सभी उत्पाद विभिन्न जरूरतों में आपकी मदद करते हैं।

इसी तरह से म्यूचुअल फंड में भी, डेब्ट फंड श्रेणी के भी लिक्विड फंड, इनकम फंड, सरकारी प्रतिभूति और फिक्स्ड परिपक्वता योजनाओं जैसे अनेक विकल्प उपलब्ध हैं जो निवेशकों की विभिन्न जरूरतें पूरी करते हैं।

काम की बात: क्या Aadhaar नंबर के जरिए खाली किया जा सकता है बैंक खाता? जानिए सच

काम की बात: क्या Aadhaar नंबर के जरिए खाली किया जा सकता है बैंक खाता? जानिए सच

आधार कार्ड (Aadhaar Card) आज भारत में रहने वाले हर नागरिक की जरूरत बन गया है। आधार कार्ड (Aadhaar Card) के बिना अब बैंक अकाउंट नहीं खुल सकता, सरकारी स्कीम्स का फायदा नहीं मिलता, बच्चों के एडमिशन नहीं हो पाता और यहां तक की कोरोना वैक्सीन लगवाने के लिए आधार कार्भीड जरूरी है। आधार की इसी इम्केपोर्टेंस ने इससे जुड़े फ्रॉड को भी बढ़ दिया है। आइए आपको बताते हैं आधार फ्रॉड (Aadhaar Fraud) से जुड़े कई सवालों के जवाब। जो खुद आधार कार्ड जारी करने वाली संस्था UIDAI (Unique identification authority of India) ने दिए हैं:

कितने दिन हो गए बैंक खाते से पैसे निकाले… चेक कर लें, कहीं ‘बंद’ तो नहीं हो गया, शुरू करने का ये है तरीका

कितने दिन हो गए बैंक खाते से पैसे निकाले. चेक कर लें, कहीं

TV9 Bharatvarsh | Edited By: आशुतोष वर्मा

Updated on: Jun 27, 2021 | 7:17 AM

बैंक के कई ग्राहकों की शिकायत है कि हाल के कुछ महीनों में उन्होंने खाते से ट्रांजेक्शन नहीं किया है जिसके चलते अकाउंट ‘इनऑपरेटिव’ या बंद हो गया है. खाता तभी शुरू होगा जब आप बैंक में जाकर इसकी दरखास्त देंगे. कुछ जरूरी अपडेशन और पूछताछ के बाद ही खाता फिर से बहाल हो पाएगा. इसके लिए आपका लेटेस्ट केवाईसी अपडेट भी करना पड़ सकता है.

टि्वटर पर एक ग्राहक ने ऐसी पैसा में खाता प्रकार ही शिकायत स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) से की है. ग्राहक का कहना है कि स्टेट बैंक ने उनके बेटे का अकाउंट लॉक कर दिया है सिर्फ इस बात पर कि एक नियत समय तक उस खाते से कोई ट्रांजेक्शन नहीं हुआ है. खातेदार बताते हैं कि बैंक ने इस बात की पॉलिसी बनाई है कि अगर एक निश्चित अवधि तक खाते से लेनदेन न हो तो उसे निष्क्रिय या इनऑपरेटिव कर दिया जाएगा. अकाउंट होल्डर के फोन पर इस बात का मैसेज गया है कि अकाउंट बंद कर दिया गया है और उसे पुनः शुरू कराने के लिए ब्रांच जाना होगा.

बैंक जाना जरूरी

बैंक की इस पॉलिसी की लोग बहुत आलोचना कर रहे हैं. ग्राहकों का कहना है कि सरकार भीड़-भाड़ रोकने के लिए की तरह के जतन कर रही है. बैंकों में भी कोरोना प्रोटोकॉल का पालन किया जा रहा है. उसमें पैसा में खाता प्रकार स्टेट बैंक ने ऐसी पॉलिसी क्यों बनाई कि बीच कोरोना में लोगों के खाते बंद किए जा रहे हैं और उसे शुरू कराने के लिए ब्रांच में जाना पड़ेगा. इससे तो ब्रांच में और भीड़ बढ़ेगी. कोरोना का खतरा और पैदा होगा. कई ग्राहकों की शिकायत है कि उनके खाते में कई-कई हजार रुपये पड़े हैं लेकिन उसे इनऑपरेटिव बताकर बंद कर दिया है. खाता शुरू कराने के लिए बैंक में आने की बात कही जा रही है.

हर खाते का अपना एक नियम है कि कितने दिन बाद उसे इनऑरेटिव कर दिया जाएगा, अगर लेनदेन न हो. बैंकों की तरफ से पासबुक या रूलबुक पैसा में खाता प्रकार में इसकी पूरी जानकारी दी जाती है. हो सकता है कि अलग-अलग खाते के लिए नियम अलग हो, लेकिन एक निश्चित निमय जरूर है. इस नियम के मुताबिक, आपको खाते में डिपॉजिट कोई भी कर सकता है, आप भी कर सकते हैं, लेकिन विड्रॉल जरूरी है. यह 2 साल के बीच किया जाना चाहिए और इसे बंद नहीं होना चाहिए. विड्रॉल नहीं करने पर खाता इनऑपरेटिव पैसा में खाता प्रकार हो जाता है. एक बार खाता इनऑपरेटिव हो जाए तो उसे शुरू करने के लिए केवाईसी कराना जरूरी है. एक बार जैसे ही विड्रॉल करते हैं, खाता फिर से ऑपरेटिव हो जाता है.

खाता क्यों होता है इनऑपरेटिव

हाल में साइबर क्राइम की घटनाएं तेजी से बढ़ी हैं. साइबर अपराधी लोगों की जानकारियां चुराते हैं फिर अकाउंट पर हाथ साफ करते हैं. ऐसे में अगर कोई खाता बहुत दिन से बिना इस्तेमाल के रहे तो खतरा बढ़ सकता है. इसे देखते हुए बैंक उसे इनऑपरेटिव कर देते हैं ताकि उस खाते का गलत इस्तेमाल न हो सके. बाद में बैंक ग्राहक को जानने के लिए केवाईसी अपडेट करते हैं और उसे फिर से चालू कर देते हैं. यह नियम पैसा में खाता प्रकार खाते की सुरक्षा के लिए ही बनाया गया है. इस नियम को सरकार ने बनाया है न कि बैंक ने.

एसबीआई का नियम है कि हाई रिस्क कस्मटर के लिए हर दो साल पर एक बार केवाईसी अपडेट कराना जरूरी है. मीडियम रिस्क वाले कस्टमर के लिए 8 साल और लो रिस्क पैसा में खाता प्रकार वाले के लिए 10 साल में एक बार केवाईसी अपडेट कराना जरूरी होता है.

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